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हरियाली का प्रतीक है छत्तीसगढ़ का पहला हरेली तिहार…. प्रदेश के किसान इसे धूमधाम से मनाते हैं…….

छत्तीसगढ़ में आज हरेली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। समय बदलता है लेकिन परंपराएं जीवित रहती हैं। हरेली तिहार में गेड़ी पर चढ़कर चलते हैं। गेड़ी चढ़कर सावन मास के उत्साह को जाहिर किया जाता है। हरेली तिहार पर कृषि यंत्रों की पूजा की जाती है। पशुधन की पूजा की जाती है। प्रदेश के किसान इसे धूमधाम से मनाते हैं। हरेली के मौके पर बैल भी सजते हैं और बैलगाड़ी भी सजती है। अपने पशुधन के सम्मान के लिए, उनकी पूजा के लिए यह बड़ा पर्व होता है

क्या होता है हरेली तिहार :-
हरेली तिहार पर कृषि यंत्रों की पूजा की जाती है। पशुधन की पूजा की जाती है। प्रदेश के किसान इसे धूमधाम से मनाते हैं। हरेली के मौके पर बैल भी सजते हैं और बैलगाड़ी भी सजती है। अपने पशुधन के सम्मान के लिए, उनकी पूजा के लिए यह बड़ा पर्व होता है। खेती किसानी की तैयारियों के बीच धरती माता के अभिवादन का यह त्योहार है।

इन व्यंजनों का चखते हैं स्वाद :-
हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती हैं। इन व्यंजनों में ठेठरी, खुरमी, चीला, फरा,मुठिया, धुसका, चांउर रोटी अंगाकर, बफौरी सादा, चउँसेला, चांउर रोटी पातर, बफौरी मिक्स दाल आदि पकवान शामिल होते हैं। बच्चे, जवान, बूढ़े, महिलायें सभी इन पकवानों का स्वाद चखते हैं। हरेली त्योहार का आनंद लेते हैं।

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